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July 25, 2011

कभी ना कहिये

बहुत बढ़िया कविता मिली   facebook पर ...

काम नहीं बना मत कहिये
कहिये "आज" नहीं बन पाया।
चुने नहीं गए तो कहिये
उनको "आज" नहीं मैं भाया।
असफलता अपनी दुनिया में
रह नहीं सकती है हमेशा
सोचोगे जो वही दिखेगा
दुनिया एक अजीब सा शीशा
नहीं बनेगा कभी ना कहिये
कहिये "कोशीश करके देखूँ"
चाहिये अगर प्रकाश मुझको
दीप की तरह मैं जलके देखूँ

तुषार जोशी, नागपुर
Source: http://kavita.hindyugm.com/2006/11/blog-post.html